रविवार, 5 नवंबर 2017

लोग..

खरबूजों से लोग
बदल लेते हैं रंग रोज़
जहर सा उगलते हैं ..
सर्पों सी उतारते हैं कैंचुली
पलटते ही बदलते हैं पहलू
गिरगिट को करते हैं शर्मसार
कैसे कह दें इन्हें इंसान..?

अक्षिणी

बुधवार, 1 नवंबर 2017

वो राह कोई..

वो राह कोई सूनी सी,
इक याद कोई भूली सी,
शोले सी सुलगती रहती है
वो चाह एक अधूरी सी..

शोले सी सिमरती रहती है
वो चाह एक अधूरी सी.
वो पाँख कोई उड़ती सी
वो आँच कोई बुझती सी
होले से हुमकती रहती है,
वो आह कोई घुटती सी..

एक फाँस कोई चुभती सी,
वो साँस कहीं सहमी सी,
एक रात जरा ठहरी सी
ज्यों राह कोई तकती सी..

अक्षिणी

इन दिनों..

दोस्ती मुमकिन नहीं है 'मैं' के मारे,
वक्त के मोहताज हैं साथ सारे इन दिनों..

नींद के आगोश में हैं ख्वाब सारे,
चाहतें चुप सी खड़ी हैं हाथ बाँधे इन दिनों..

चल चलें, छोड़ आएं प्रीत के गीत सारे,
मन को यूँ चुभने लगे हैं मीत सारे इन दिनों..

धूप को मिलती नहीं अब छाँव कोई,
ज़िंदगी आसां नहीं है इस किनारे इन दिनों..

-अक्षिणी

शुक्रवार, 20 अक्तूबर 2017

Hinduism and Festivals..

Hinduism is the most environmental friendly religion.It believes in co existence with all living and non living beings.
Hindu festivals are designed according to weather cycle.

Sankranti marks Sun's transit to 'Makar'(Capricorn) marking the end of Winter.The days start getting longer.
Lohidi,Pongal,Sankranti the names may differ but these festivals mark the arrival of summers and new crop..

Holi is the spring festival..originated as 'Basantotsava' it marks the arrival of spring..

Chaitra Navratra begins from first day of the solar year.Nine days of fasting provides a period of praying and detox.

Acc to Hindu Calender Rainy season lasts from Jyeshtha to Bhadrapad..Rains leading to moisture,dampness and insects.
Deepawali/Diwali is not just lighting lamps.That's the least and last of it..

Cleaning and preparing houses n surrounding before winters is what Diwali is all about.
Burning of mustard oil diyas help kill the insects bred in Rainy days.Preparing a lot of food for coming days..

Diwali also provides us an occasion to rejuvenate our souls after enduring rains and staying indoors during monsoon..

Goverdhan Pooja is a way to show our gratitude to the livestock..

So no..our festivals are not just a way to strut around in finery and give lessons about environment.

We have a scientific reason behind every ritual which may have been modified through the course of time.

It's a fact.
ऊँ सहनाववतु
सहनोभुनक्तु
सहवीर्यं करवावहै,
तेजस्वीनापतितम्
अस्तु मा विद्विषावहै.
together we protect each other.

Akshini

बुधवार, 18 अक्तूबर 2017

पटाखा हूँ..

पटाखा हूँ छूटने के इंतजार में,
चलाया जाता हूँ हर बार मैं,
कभी सफेद कभी हरे लिबास में,
लौट आता हूँ हर बार मैं..

देसी पुतलों सा तैयार मैं,
विलायती रंगरोगन की चमकार मैं,
चलता सा दिखता हूँ बाजार मे,
फिर निकल आता हूँ बेकार मैं..

राकेट सा छूटता हूँ हर बार मैं,
बिना बारूद का अनार मैं,
लौट आता हूँ हर बार मैं,
रह गया हूँ ख़ाक का भंडार मैं..

रोशनी ले छूटने को तैयार मैं,
न शोर,न कोई चमकार मैं,
धुएं संग गर्द का गुबार मैं,
पटाखा हूँ छूटने के इंतजार मैं..

आखिर रागा हूँ यार मैं..

अक्षिणी

मुहब्बत और ताज..


निशानेइश्क इस ताज में दफन कई राज़ हैं,
वो मुहब्बत ही क्या जो ताज की मोहताज है..

अक्षिणी

In Tune..


Just be in tune with nature's symphony.. you will find your note to play on..

-Akshini