शुक्रवार, 23 मार्च 2018

कशमकश

दिमाग की कहें तो दिल न माने,
दिल की बातें दिमाग क्या जाने..
-अक्षिणी

वाह री दिल्ली..

वाह री दिल्ली
क्या दिन आए हैं ..
दिल्ली के मालिक
चौखट चौखट
नाक रगड़ रहे हैं..

-अक्षिणी

शहीद दिवस

देह भी दें ,नेह भी दें
प्राण भी दें ,मान भी दें
माँ भारती को हम
समुचित सम्मान भी दें..
जी सकें निज देश हेतु,
आन पर हम जान भी दें..

अक्षिणी

दोहरे प्रतिमान..

धन्य हो संसार,
कितने दोहरे प्रतिमान
कहने को देवी का नाम,
न मान न सम्मान,
न मुझ पर अभिमान
पग-पग अपमान,
तिल-तिल तिरस्कार,
झूठा नारी पे अहसान

अक्षिणी

ज़िंदगानी

कथा है या कहानी है,
तेरी है या मेरी जुबानी है..
हँसते गाते पूरी हो बस
छोटी सी ये ज़िंदगानी है..

अक्षिणी

गुरुवार, 8 मार्च 2018

औरतें..

औरतें,
सुबह की धूप सी औरतें
हवाओं के साथ चलती हैं..
बदलाव की आहट सुनती हैं,
इंकलाब की आवाज़ बनती हैं..

औरतें,
बहते पानी सी औरतें,
किनारों का मन रखती हैं.
तसवीरों में चेहरे टांगती हैं,
और दीवारों को घर करती हैं..

औरतें,
गीली मिट्टी सी औरतें,
हर रूप-रंग में ढलती हैं.
खुशबू सी बिखरती हैं,
तपती हैं, निखरती हैं..

औरतें,
पारे की बूँदों सी औरतें,
टूटती हैं, दरकती हैं.
गिरती हैं, सँभलती हैं,
फिर जंग नई लड़ती हैं..
औरतें,
इंकलाब की आवाज़ बनती हैं..

अक्षिणी

रविवार, 4 मार्च 2018

हम..

डरते नहीं हैं,
सच कहने का दम रखते हैं..
चुभते रहे हैं ,
लड़ने का खम रखते हैं..
कड़वे भले हैं,
ज़माने पे रहम रखते हैं..
दोगले नहीं हैं,
निगाहों की शरम रखते हैं..

अक्षिणी