बुधवार, 11 अक्तूबर 2017

बेटियाँ..


बारहा हाशियों पे
उभर आतीं हैं बेटियाँ..
तपती हैं अंगारों पे,
निखर आतीं हैं बेटियाँ..
जूझती हैं जी भर ,
सँवर जाती हैं बेटियाँ..
हादसों का दौर हो,
मुश्किलों का शोर हो,
हर बार उबर आती हैं..
जो चोट हो अपनों पे तो,
हद से गुज़र जाती हैं बेटियाँ..

अक्षिणी

दिल्ली के मालिक..

दिल्ली के मालिक,
चप्पल छाप बिगड़े नवाब,
आम आदमी का झंडा,
ले कर आए थे आप..?
भूल गए..?

दिल्ली के सरकार ज़रा होश में आएं आप,
ये दिल्ली है जनाब ठरकी सुलतान.
किसी एक की हुई न कभी,
कई आए राजा राजे या बादशाह..

दिल्ली के मालिक,
ज़रा होश में आएं आप
आहिस्ता बोलें झूठों के सरदार,
कहीं सुन ना लें असली सरकार

#दिल्ली_मालिक

अक्षिणी

बनावटी लोग..


झूठे दिखावटी लोग,
मतलबी बनावटी लोग..
बस दूर से अच्छे लगते हैं,
ये नकली सजावटी लोग..

अक्षिणी

Take time..

Take time to sit back,
Take time to look back,
Take time to get back....

Take time sit back,
Take time to look back,
Take time to hit back..

Take time to sit back,
Take time to write back,
Take time to get back...

Akshini

उजालों से..


सुबह कभी रुकती नहीं ,
रात के हवालों से..
अंधेरों की हैसियत ही क्या ?
जो रार ले उजालों से..

अक्षिणी

The child in me..


Once he smiled,
Once he played,
had some time..
Once he had a life..

The child in me,
The wild in me,
Lost it's say,
Gone day by day..

Once he talked,
Once he rocked,
Had some sway,
Lost the will to play,

The child in me,
The wild in me,
Had a very little say,
Gone far away..

#the child in me..

Akshini

आस

ये आस भी कमबख्त चीज़ है बड़ी खास,
भूलने ही नहीं देती ज़िंदा होने का अहसास..

ये आस भी कमबख़्त चीज़ है बड़ी खास,
मंजिलें दिखाई देती हैं कहीं आस-पास..

ये आस भी कमबख़्त चीज़ बड़ी है खास,
सुबह आएगी ज़रूर,रात कितनी हो उदास..

ये आस भी कमबख़्त चीज़ बड़ी है खास
आदमी हारता नहीं,करता रहता है प्रयास..

जब तक चलेगी साँस,ज़िंदगी आस दर आस,
इसीलिए कहा न ये आस चीज़ है बड़ी खास..
#आस

अक्षिणी